बिम्सटेक देशों में भारत अग्रणी भूमिका निभाता है। थाईलैंड में हो रहे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने यूपीआई को जोड़ने, बिम्सटेक चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना करने और व्यापार बढ़ाने समेत कई प्रस्ताव रखे।
बिम्सटेक देशों में भारत का दबदबा बरकरार है। थाईलैंड में हो रहे छठवें बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में पीएम नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों को यूपीआई से जुड़ने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने कहा कि इससे क्षेत्र में व्यापार, कारोबार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने बिम्सटेक चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना करने, वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन आयोजित करने और क्षेत्र में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने की संभावनाएं तलाशने का भी प्रस्ताव रखा।
भारत की नेतृत्व क्षमता का सशक्त प्रमाण
भारत ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में एक बार फिर अपनी नेतृत्व क्षमता का प्रमाण प्रस्तुत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) से जुड़ने का प्रस्ताव रखा। उनका कहना था कि यूपीआई का विस्तार बिम्सटेक देशों में व्यापार, पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देने में मदद करेगा। यूपीआई के माध्यम से क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए एक मजबूत आधार तैयार होगा। भारत ने यूपीआई के रूप में एक ऐसी वित्तीय प्रणाली विकसित की है, जो सरल, सुरक्षित और त्वरित लेन-देन की सुविधा प्रदान करती है। इसका लाभ बिम्सटेक देशों को भी मिल सकता है, क्योंकि यह प्रणाली सीमाओं के पार डिजिटल भुगतान को सहज और सुरक्षित बनाती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी प्रस्ताव रखा कि बिम्सटेक देशों में एक चैंबर ऑफ कॉमर्स की स्थापना की जाए, जो व्यापारियों और उद्योगपतियों के बीच सहयोग को बढ़ावा दे सके। यह चैंबर बिम्सटेक देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। इसके साथ ही, बिम्सटेक देशों को एक मंच पर लाकर विभिन्न व्यापारिक अवसरों की पहचान की जा सकती है, जिससे सदस्यों के बीच आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
इसके अलावा, पीएम मोदी ने वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन के आयोजन का प्रस्ताव भी रखा, जिसका उद्देश्य सदस्य देशों के व्यापारिक और आर्थिक संबंधों को और प्रगाढ़ करना होगा। इस सम्मेलन में बिम्सटेक देशों के बीच व्यापार, निवेश और साझेदारी के नए रास्ते तलाशे जा सकते हैं। इसका उद्देश्य बिम्सटेक देशों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाने का होगा।
आपदा प्रबंधन में सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के बीच आपदा प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। उन्होंने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप में हुई जान-माल की हानि पर संवेदना व्यक्त की और आपदा प्रबंधन के लिए भारत में बिम्सटेक उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना का प्रस्ताव रखा। यह केंद्र आपदा प्रबंधन, राहत कार्य और पुनर्वास पर सहयोग करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। भारत ने हमेशा आपदा के समय अपने पड़ोसी देशों की मदद की है और बिम्सटेक के तहत भी इस तरह की पहल को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
भारत ने यह सुनिश्चित करने का प्रस्ताव रखा कि बिम्सटेक देशों के बीच आपदा तैयारियों को साझा किया जाए, ताकि संकट के समय सभी सदस्य देश त्वरित और प्रभावी सहायता प्रदान कर सकें। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि बिम्सटेक देशों को अपने आपसी संबंधों को और गहरा करना चाहिए, ताकि आपदा के समय एकजुट होकर त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके।
बिम्सटेक का क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में योगदान
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि यह संगठन दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल का काम करता है। उन्होंने बिम्सटेक के दायरे और क्षमताओं को बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। बिम्सटेक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, समृद्धि और सहयोग के लिए एक प्रभावी मंच के रूप में उभर रहा है। इसके माध्यम से, सदस्य देशों के बीच परिवहन, ऊर्जा, पर्यटन, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिम्सटेक को वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए सभी सदस्य देशों को एकजुट होकर काम करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि बिम्सटेक को आपसी सहयोग और साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर और प्रभावी संस्थागत ढांचा स्थापित करने की आवश्यकता है। उन्होंने गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने की पहल की सराहना की और भारत में इसकी पहली बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव रखा।
बिम्सटेक और भारत के लिए भविष्य की दिशा
बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग और संवाद को बढ़ाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता एक बार फिर स्पष्ट हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक को एक ऐसा मंच बनाने का प्रस्ताव रखा है, जो न केवल क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बढ़ाए बल्कि सदस्य देशों के बीच सांस्कृतिक और आर्थिक संबंधों को भी प्रगाढ़ करे। इसके माध्यम से, बिम्सटेक देशों के बीच सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने और एक समृद्ध भविष्य की दिशा में काम किया जा सकता है।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के नेताओं से यह अपील की कि वे एक-दूसरे के साथ सहयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहें। उन्होंने कहा कि बिम्सटेक का भविष्य एकजुटता और साझेदारी में है और इसे क्षेत्रीय और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति को और मजबूत करने के लिए एकजुट होकर काम करना होगा।