उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद में रंगाई और पुताई का काम रविवार की सुबह शुरू हो गया। यह कार्य उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर किया जा रहा है, जिसमें मस्जिद की सजावट और रंगाई का निर्देश दिया गया था। इस कार्य की निगरानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा की जाएगी।
जामा मस्जिद की ऐतिहासिक महत्ता और रंगाई-पुताई का कार्य
संभल की जामा मस्जिद, जो मुग़ल काल की एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर मानी जाती है, उसकी संरचना और सौंदर्य को बनाए रखने के लिए नियमित देखरेख की आवश्यकता होती है। 12 मार्च को उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय ने मस्जिद की रंगाई और सजावट का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद, 13 मार्च को एएसआई की टीम मस्जिद का निरीक्षण करने के लिए पहुंची और उसने मस्जिद के बाहरी हिस्से और भीतर के परिसर का जायजा लिया।
मस्जिद की रंगाई-पुताई के काम की शुरुआत रविवार को हुई, जब स्थानीय श्रमिकों और पेंटर्स ने काम शुरू किया। एएसआई की टीम और जामा मस्जिद की कमेटी के सदस्य भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसके बाद शनिवार को पेंटर्स की टीम मस्जिद पहुंची थी, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका था। हालांकि, रविवार को रंगाई का काम पूरे जोश और समर्पण के साथ आरंभ हुआ।
एएसआई की टीम की निगरानी
मस्जिद की रंगाई और सजावट का कार्य उच्च न्यायालय के आदेश के तहत किया जा रहा है, और एएसआई की टीम द्वारा इस कार्य की निगरानी की जा रही है। एएसआई के अधिकारियों ने मस्जिद के बाहरी हिस्से का निरीक्षण किया, और वहां पुताई की प्रक्रिया को सुनिश्चित किया। एएसआई के अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि पेंटिंग कार्य में इस्तेमाल किए जाने वाले रंग और सामग्री मस्जिद की ऐतिहासिक संरचना के साथ मेल खाते हों।
एएसआई की टीम ने मस्जिद के विभिन्न हिस्सों की निरीक्षण प्रक्रिया में यह भी देखा कि पुताई से पहले कुछ जरूरी साफ-सफाई का कार्य किया जाना चाहिए। इसके बाद स्थानीय पेंटर और श्रमिकों की टीम द्वारा सफाई की प्रक्रिया पूरी की गई। पेंटिंग के लिए विशेष रूप से चुने गए रंग इस तरह से थे कि वे मस्जिद की ऐतिहासिक छवि और उसकी स्थापत्य शैली को और अधिक आकर्षक बना सकें।
पुताई के कार्य में शामिल लोग
रंगाई के कार्य में शामिल पेंटर्स की टीम में तीन सदस्यीय एक टीम थी, जो मस्जिद के भीतर और बाहर की दीवारों पर पुताई का कार्य कर रही थी। इस टीम में एक मुख्य पेंटर और उसके दो सहायक शामिल थे। शनिवार को इन पेंटर्स ने मस्जिद के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया और वहां सफाई की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके बाद रविवार को पुताई का काम आरंभ हुआ।
इसके अलावा, स्थानीय श्रमिकों की भी एक टीम थी, जो पेंटिंग कार्य में मदद कर रही थी। यह श्रमिक स्थानीय स्तर पर ही नियुक्त किए गए थे और उन्होंने पुताई के काम में सहयोग किया। इस कार्य के लिए जिन रंगों का चयन किया गया, वे प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल थे, ताकि मस्जिद की संरचना को नुकसान न हो।