सुबह 4 बजे अमित शाह ने क्यों कि शिंदे से मुलाकात,महाराष्ट्र सरकार पर शिवसेना का बड़ा हमला,
महाराष्ट्र राजनीति में अनबन की खबरें सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस के बीच कुछ सही नहीं चल रहा। ऐसे में शिवसेना यूबीटी सांसद संजय राऊत ने महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने एकनाथ शिंदे की केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से पुणे के वेस्टीन होटल में मुलाकात का हवाला देते हुए कहा कि शिंदे ने अपनी शिकायत में बताया कि राज्य सरकार में उनकी कोई इज्जत नहीं है। शिंदे का कहना था कि कल तक वे मुख्यमंत्री थे, लेकिन अब उनके फैसले पलट दिए जा रहे हैं। यह बैठक सुबह 4 बजे हुई थी, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। राऊत ने इस मुलाकात को महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट का प्रतीक बताया और कहा कि यह सब कुछ दिखाता है कि राज्य का नेतृत्व अब दिल्ली के हाथों में है।
महाराष्ट्र में मराठी लोगों का स्वाभिमान खो गया
संजय राऊत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में मराठी लोगों का स्वाभिमान अब खो गया है। राज्य में मराठी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कई आयोजन हुए, लेकिन उनके मुताबिक इन आयोजनों से कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। राज्य की राजनीतिक स्थिति में बदलाव का संकेत देते हुए उन्होंने कहा कि मराठों में आंतरिक विभाजन की स्थिति बनी हुई है, जो ऐतिहासिक दृष्टि से महाराष्ट्र के लिए खतरनाक हो सकता है। उन्होंने शिवाजी महाराज का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आज का महाराष्ट्र इसी तरह राजनीतिक और सामाजिक बंटवारे का शिकार रहा, तो वह समय भी आ सकता है जब लोग अपने स्वाभिमान के लिए संघर्ष करने की बजाय सत्ता के मोह में फंस जाएंगे।
संजय राऊत ने BJP पर लगाए आरोप
राऊत ने यह भी आरोप लगाया कि महाराष्ट्र की संपत्ति और उद्योग धीरे-धीरे गुजरात में स्थानांतरित हो रहे हैं, और पेटेंट का मुख्यालय मुंबई से दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया है, जो एक संकेत है कि महाराष्ट्र के विकास को अन्य राज्यों के विकास के लिए खतरे में डाला जा रहा है। बेलगाम में मराठी लोगों पर हो रहे हमलों का मुद्दा भी उठाया गया, लेकिन राज्य सरकार इससे नज़रअंदाज कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री फडणवीस के आदेश का भी विरोध किया, जिसमें मंत्रालय के कामकाज को पूरी तरह से मराठी में चलाने की बात की गई थी।
संजय राऊत ने अंत में कहा कि वर्तमान में जो राजनीतिक स्थिति बन रही है, वह महाराष्ट्र के लिए शुभ नहीं है। वे इसे एक गंभीर संकट मानते हैं, जिसमें मराठी माणुस की प्रतिष्ठा और स्वाभिमान को कमजोर किया जा रहा है।