मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बीच गाजियाबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में संघ ने डॉ. भीमराव अंबेडकर के पूरे नाम “भीमराव रामजी अंबेडकर” का उपयोग करने पर जोर दिया। संघ का मानना है कि अंबेडकर के नाम से “रामजी” शब्द को जानबूझकर हटा दिया गया था, जबकि उन्होंने संविधान पर अपने पूरे नाम से हस्ताक्षर किए थे। इसके अलावा, अंबेडकर की छवियों में विविधता लाने और सम्मानजनक शब्दों जैसे “आदरणीय”, “परम आदरणीय”, या “पूजनीय” का उपयोग करने का प्रस्ताव भी रखा गया।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि 14 अप्रैल को अंबेडकर जयंती को पूरे प्रदेश में धूमधाम से मनाया जाएगा, जिसमें उनकी अलग-अलग छवियों और उनके योगदान को विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर, अंबेडकर की छवियों में विविध रंगों का प्रयोग किया जाएगा, ताकि उनकी छवि को और अधिक विविध रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

बैठक में प्रदेश भाजपा के नए अध्यक्ष के चयन पर भी चर्चा की गई, और बताया गया कि प्रदेश भाजपा ने इस प्रक्रिया को पूरा कर लिया है, जिसमें जिला अध्यक्षों के चुनाव भी शामिल थे। भाजपा के वरिष्ठ नेता के अनुसार, यह समन्वय बैठक आगामी चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण है, खासकर 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर। भाजपा की सीटों की संख्या 2019 के 62 से घटकर 2024 में 33 रह गई थी, जिससे पार्टी को एक बड़ा झटका लगा था। इस बैठक में भाजपा के कई प्रमुख नेता और आरएसएस के पदाधिकारी उपस्थित थे, और गाजियाबाद में स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में यह बैठक करीब साढ़े 4 घंटे तक चली।

संघ की बैठक में यूपी बीजेपी चीफ भूपेंद्र चौधरी, संघ के मेरठ और ब्रज क्षेत्र के पदाधिकारी सहित कई अनुषांगिक संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भाजपा और संघ के बीच समन्वय बढ़ाना और आगामी चुनावों के लिए रणनीतियाँ तैयार करना था।

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