बहराइच, उत्तर प्रदेश – हाल ही में बहराइच में हुई हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए इस बवाल में उपद्रवियों ने तोड़फोड़ और आगजनी की, जबकि पुलिस और पीएसी स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहीं।

हर साल बहराइच में प्रतिमा विसर्जन के अवसर पर डीजे के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है, लेकिन इस बार प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती। यात्रा का मार्ग पहले से तय था, फिर भी पुलिस ने आवश्यक सुरक्षा कदम नहीं उठाए। जब स्थिति बिगड़ी, तो पुलिस बल नाकाफी साबित हुआ और उपद्रवियों ने अपने मनमाने तरीके से बवाल किया।

त्योहार से पहले मुख्यमंत्री ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिशा-निर्देश दिए थे, जिसमें जोन, रेंज और जिला कप्तान शामिल हुए थे। विशेष रूप से विसर्जन के दौरान सतर्कता बरतने का आदेश दिया गया था।

हालांकि, इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, अफसरों की लापरवाही और नाकामी ने स्थिति को बिगड़ने की अनुमति दी। जब सुरक्षा की आवश्यकता थी, तब प्रशासन ने आवश्यक कदम उठाने में असफल रहा, और हिंसा ने सभी आदेशों की धज्जी उड़ा दी।

उपद्रवियों ने नाई की दुकान समेत तीन गुमटियों को पलट दिया। इस दौरान केवल तोड़फोड़ ही नहीं, बल्कि गुमटियों में आगजनी भी की गई,

हिंसा के दौरान खैरीघाट थाना प्रभारी संजय सिंह की लापरवाही ने स्थिति को और भी बिगाड़ दिया। उनके असंवेदनशील रवैये के कारण उपद्रवियों ने मस्जिद के गेट पर लगे दो गुंबदों को क्षतिग्रस्त कर दिया।

पुलिस और पीएसी के जवान स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास में हैं, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, तनाव बढ़ता जा रहा है। युवा वर्ग की आक्रोशित भीड़ ने प्रशासन के सामने एक चुनौती उत्पन्न कर दी है, जिससे स्थिति और भी जटिल हो रही है।

बहराइच के रेहुआ गांव में भारी पुलिस बल और पीएसी की तैनाती के बावजूद, स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। प्रदर्शन स्थल पर सैकड़ों युवा हाथों में लाठी-डंडा लेकर नारेबाजी करते हुए सड़कों पर घूम रहे हैं।

पुलिस और पीएसी के जवान लाचार नजर आए, जबकि अराजक भीड़ लाठी-डंडे लेकर बवाल मचाती रही। कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें उपद्रवी गाड़ियों को तोड़ते और आगजनी करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस सबके बीच, पुलिसकर्मी केवल खड़े रहे,

सोमवार सुबह, रामगोपाल के शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया। लेकिन जैसे ही शव रेहुवा गांव पहुंचा, स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। स्थानीय निवासियों ने पुलिस और प्रशासन के खिलाफ एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और “मुर्दाबाद” के नारे लगाने लगे।

जब तहसीलदार लोगों को समझाने के लिए पहुंचे कि अंतिम संस्कार किया जाए, तो उन्हें विरोध का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोग इतनी भड़के हुए थे कि तहसीलदार को वहां से भागना पड़ा।

महसी के महराजगंज कस्बे में प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान हुई पत्थरबाजी और गोलीकांड ने पूरे जिले में तनाव और भय का माहौल बना दिया है।

सोमवार सुबह से ही जिले में डर और दहशत का माहौल देखा गया। स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित थे, जिससे शहर की मुख्य बाजार घंटाघर से लेकर पीपल तिराहे तक की दुकानें बंद रहीं। व्यापारी और ग्राहक दोनों ही अपनी जान-माल की सुरक्षा के मद्देनजर घरों में कैद रहे।

बहराइच की महसी तहसील के महराजगंज कस्बे में रविवार शाम को गाने को लेकर हुए विवाद के बाद दूसरे समुदाय के युवकों ने पथराव शुरू कर दिया। इससे दुर्गा प्रतिमा खंडित होने पर पूजा समिति के सदस्यों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया तो दूसरे समुदाय के लोग रामगोपाल मिश्रा (24) को घर के अंदर घसीट ले गए और गोली मार दी। उसे बचाने पहुंचे राजन (28) भी गंभीर रूप से घायल हो गए।

घटना का पूरे जिले में विरोध शुरू हो गया। विसर्जन कमेटी के लोगों ने बहराइच-सीतापुर हाईवे पर चहलारी घाट पुल के पास जाम लगा प्रदर्शन शुरू कर दिया। बहराइच-लखनऊ हाईवे भी जाम कर दिया गया। 

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