उमर अब्दुल्ला 16 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने जा रहे हैं। यह उनके लिए मुख्यमंत्री के रूप में दूसरी पारी होगी, क्योंकि उन्होंने पहले 2009 से 2014 तक यह पद संभाला था।

उमर अब्दुल्ला ने 1998 में लोकसभा के सदस्य के रूप में अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की। उन्होंने केंद्रीय मंत्री और विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है।

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) और कांग्रेस के गठबंधन ने जम्मू-कश्मीर में सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उमर अब्दुल्ला ने उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात की और अपने गठबंधन सहयोगियों का समर्थन पत्र प्रस्तुत किया।

उमर अब्दुल्ला की शपथ ग्रहण समारोह में कई महत्वपूर्ण नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि शपथ ग्रहण समारोह में इंडिया गठबंधन के किसी नेता को आमंत्रित करने का निर्णय नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला करेंगे।

इस बार के चुनाव में नेकां ने 90 में से 42 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 6 सीटें जीतीं। दोनों दलों के पास 90 सदस्यीय सदन में बहुमत है, जिसमें निर्दलीय उम्मीदवारों का भी समर्थन शामिल है।

उमर ने कहा कि सरकार गठन के लिए निर्दलीय उम्मीदवारों द्वारा समर्थन की बात की जा रही है। उन्होंने जम्मू की अनदेखी के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह गलत है।

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