Navratri 2024 : शक्ति की आराधना के पर्व नवरात्रि पर देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश के सागर शहर में सदियों पुराना प्रसिद्ध बागराज मंदिर है। यहां हरसिद्धि माता तीन रूपों में विद्यमान हैं। ऐसा माना जाता है कि कुछ दशक पहले भी बाघ यहां देवी मां के दर्शन के लिए आते थे। वह अपनी माँ की सेवा करके जीवन व्यतीत करता था। चूंकि यह जंगली इलाका है इसलिए यह भटके हुए लोगों को रास्ता भी दिखाता है। फलस्वरूप यह क्षेत्र बागराज के नाम से जाना जाने लगा। मंदिर परिसर में एक बाघ की मूर्ति भी है। जिसकी पूजा की जाती है. मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि यह शहर के 90 फीसदी परिवारों की कुलदेवी हैं.

प्रसिद्ध बाघराज मंदिर में नवरात्रि के समय पर सत चंडी महायज्ञ का आयोजन पिछले 54 सालों से किया जा रहा है. मंदिर परिसर में विशाल मेला लगता है. सैकड़ो की संख्या में रोजाना माता के दर्शन करने के लिए श्रद्धालु पहुंच रहे हैं. अष्टमी और नवमी पर विशेष रूप से लोग माता को खप्पर चढ़ाने के लिए पहुंचते हैं.

तीन पीढियां से मंदिर में सेव कर रहे पुजारी पुष्पेंद्र पाठक महाराज ने कहा कि पहले यह मंदिर शहर के बिल्कुल बाहर था. यह पहाड़ी और जंगल वाला इलाका था. यहां पर बाघों का बसेरा रहता था धीरे-धीरे आबादी बढ़ती गई. शहर का विकास होता गया बाघों की संख्या घटती गई. लेकिन बाघ अपनी अतीत की निशानी यहां छोड़ गए हैं. अब माता के दर्शन करने के लिए जो भी श्रद्धालु आता है. किसी भी तरह की मनोकामना हो वह पूरी होती है.

माता किसी को भी खाली हाथ अपने दरबार से नहीं भेजती हैं. इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि पहले यहां केवल माता का चबूतरा था, धीरे-धीरे माता की एक मडिया बनी लेकिन अब मंदिर ने विशाल और भव्य रूप ले लिया है. माता मंदिर परिसर में एक गुफा भी है. जिसमें अजगर दादा रहते हैं. जिन्हें सिद्ध सन्यासी संत के रूप में पूजा जाता है. लेकिन आज तक कभी इस इलाके में किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है. यही माता और अजगर दादा की महिमा है.

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