महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नागपुर में हुई हिंसा के लिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस हिंसा के पीछे एक झूठी अफवाह थी, जिसे फैलाकर इलाके में दंगे भड़काए गए। मुख्यमंत्री ने इस घटना को लेकर स्पष्ट किया कि जब तक हिंसा में शामिल सभी व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए जाते, वह शांत नहीं बैठेंगे।
फडणवीस ने बताया कि इस हिंसा में मालेगांव कनेक्शन हो सकता है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग इसे बांग्लादेशी लिंक से जोड़ रहे हैं। उन्होंने मालेगांव में हुए हमले और इस हिंसा के बीच संभावित संबंधों पर भी विचार व्यक्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि यह देखा गया है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट बंगाली में थे, जो बांग्लादेशी भाषा से मेल खाते थे। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच की जाएगी, और यह देखा जाएगा कि क्या इसके पीछे कोई बड़ा डिजाइन है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस हिंसा के सिलसिले में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कुछ सदस्यों के खिलाफ भी मामले दर्ज किए गए हैं। इससे यह साफ होता है कि हिंसा में कई पक्ष शामिल थे, और राज्य सरकार इस पर पूरी तरह से काबू पाने के लिए तत्पर है।
देवेंद्र फडणवीस ने पहले मालेगांव में बांग्लादेशी और रोहिंग्या मुस्लिमों की घुसपैठ की आशंका जताई थी। उनका कहना था कि इन लोगों को फर्जी तरीके से बर्थ सर्टिफिकेट जारी किए जा रहे हैं, जिससे वे महाराष्ट्र में स्थायी रूप से रह सकते हैं। इस विषय पर उन्होंने एक विशेष जांच समिति का गठन कर जांच की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया था।
भा.ज.पा. नेता किरीट सोमैया ने भी मालेगांव को ‘वोट जिहाद’ का केंद्र बताया था। उनका आरोप था कि मालेगांव में बांग्लादेशी और रोहिंग्याओं के घुसपैठ की वजह से वहां के चुनावी समीकरण बदल रहे हैं और धर्मनिरपेक्षता की आड़ में वोट बैंक की राजनीति की जा रही है।
सीएम फडणवीस की ओर से यह बयान इस हिंसा की गहराई को लेकर की गई गंभीर चिंताओं को उजागर करता है। राज्य सरकार ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है और उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया जाएगा।