MBBS Exam Scam: हरियाणा में हुआ MBBS एग्जाम घोटाला
हरियाणा के MBBS एनुअल और सप्लीमेंट्री एग्जाम घोटाले में शामिल पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय रोहतक (UHSR) के एक कर्मचारी के घर से पुलिस ने 6 लाख रुपए बरामद किए हैं। इसके अलावा घर से एग्जाम में यूज की गई पेपर सिलाई मशीन और दो सेल फोन भी पुलिस को मिले हैं।
इस एग्जाम घोटाले में हरियाणा पुलिस ने 24 छात्रों और 17 कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। जिस कर्मचारी के घर से रुपए और अन्य सामान की बरामदगी हुई है, उसका नाम भी एफआईआर में शामिल है।
इस मामले के जांच अधिकारी ने बताया कि, आरोपियों में से एक रोशन लाल के पास से नकदी और मशीन जब्त की गई है। रोशन लाल समेत 3 आरोपियों गिरफ्तार किया जा चुका है, जो फिलहाल जेल में हैं।
कैसे किया गया घोटाला ?
परीक्षा में छात्र स्याही सूखने वाले पेन का इस्तेमाल करते थे
चोरी छिपे उत्तर पुस्तिकाएं यूनिवर्सिटी से बाहर भेजी जाती थीं
हेयर ड्रायर से स्याही को उत्तर पुस्तिकाओं से गायब किया जाता
सही जवाब लिखने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं को दोबारा सेंटर भेजा जाता था
रिश्वत के पैसे से घर बनवाया
सूत्रों की माने तो, एक निजी कॉलेज के एमबीबीएस छात्रों से उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में छेड़छाड़ करके परीक्षा पास कराने के लिए रिश्वत ली गई थी। नकदी आरोपी के पैतृक गांव स्थित घर में रखी गई थी। उसने कथित तौर पर रिश्वत की कुछ राशि का इस्तेमाल अपना घर बनवाने में किया है।
हालांकि पुलिस अभी इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों की माने तो, इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने बाकी हैं।
यूनिवर्सिटी के प्रोग्रामर ने भेजे पेपर
सूत्रों के मुताबिक, वॉट्सऐप के जरिए लीक हुए परीक्षा के पेपर लेने के लिए दो फोन का इस्तेमाल किया गया था। ये पेपर UHSR के एक अन्य कर्मचारी ने भेजे थे, जो प्रोग्रामर के तौर पर काम करता था। उसने प्रति पेपर 30,000 रुपए लिए थे। लीक हुए पेपर को एक कर्मचारी के घर पर हल किया गया और आंसर शीट को मुख्य आंसर शीट से बदला गया। इसके लिए गोपनीयता शाखा में तैनात एक अन्य कर्मचारी की मदद ली गई।
ऐसे देते थे नकल माफिया घोटाले को अंजाम
स्टूडेंट मिटने वाली स्याही का प्रयोग कर देते थे एग्जाम
हेयर ड्रायर का यूज कर स्याही को मिटाने का करते थे काम
इसके बाद आंसर शीट कर्मचारी यूनिवर्सिटी के बाहर ले जाते थे
घोटालेबाज कर्मचारी फिर आंसर शीट भरकर जमा कर देते थे
इस काम के लिए स्टूडेंट्स से 3 से 5 लाख रुपए लेते थे कर्मचारी
रोहतक PGI की है पेपर-स्टिचिंग मशीन
पेपर-स्टिचिंग मशीन का इस्तेमाल उत्तर पुस्तिकाओं के पहले पृष्ठ को बदलने के लिए किया गया था, जिसमें सीरियल नंबर, बारकोड और निरीक्षक के हस्ताक्षर जैसे विवरण शामिल थे। कथित तौर पर यह मशीन रोहतक PGIMS , UHSR के ऑपरेटिंग थिएटर में तैनात एक वाहक द्वारा पैसे के बदले में उपलब्ध कराई गई थी। मशीन को आरोपी के घर में छिपा दिया गया था ताकि पता न चले।
करनाल के कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज के निदेशक डॉ. एम.के. गर्ग की अध्यक्षता में गठित जांच पैनल ने ये भी पता लगाया है कि कुछ पेपरों की सिलाई में छेड़छाड़ की गई थी।