गुजरात के बनासकांठा जिले में मंगलवार को एक बड़े हादसे ने समूचे क्षेत्र को शोक में डाल दिया। यहां डीसा कस्बे के नजदीक स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट के बाद भीषण आग लग गई, जिससे 13 लोगों की मौत हो गई और चार अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में फैक्ट्री का एक स्लैब भी ढह गया, जिससे मलबे में कई लोगों के फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। आग के बाद फैक्ट्री के कुछ हिस्सों में भयंकर विस्फोट भी हुए, जिनकी वजह से आसपास की स्थिति और भी गंभीर हो गई।

घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस, अग्निशमन विभाग और राहत टीमें मौके पर पहुंच गईं और बचाव कार्य शुरू किया। बनासकांठा कलेक्टर मिहिर पटेल ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि डीसा के औद्योगिक क्षेत्र में सुबह एक बड़े विस्फोट की सूचना मिली थी। अग्निशमन विभाग ने आग पर काबू पाने के लिए त्वरित कार्रवाई की, लेकिन विस्फोट इतना जबरदस्त था कि फैक्ट्री का एक स्लैब ढह गया। बचाव कार्य में कोई भी कोताही नहीं बरती जा रही है और मलबे में दबे हुए श्रमिकों को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

डीसा के ग्रामीण पुलिस थाने के निरीक्षक विजय चौधरी ने बताया कि अग्निशमनकर्मी और पुलिसकर्मी मलबे में फंसे लोगों को निकालने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना में शुरुआती तौर पर तीन लोगों के मृत होने की पुष्टि की गई थी, लेकिन बाद में मृतकों की संख्या बढ़कर 13 हो गई। घायल श्रमिकों को इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन ने रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज कर दिया है, ताकि मलबे में फंसे श्रमिकों को समय रहते निकाला जा सके।

अधिकारियों के अनुसार, फैक्ट्री में आग लगने के बाद लगातार विस्फोट होने की वजह से स्थिति और भी भयावह हो गई। अब तक यह जानकारी सामने नहीं आई है कि विस्फोट की वजह क्या थी, लेकिन इस तरह के हादसे में अक्सर सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाती है। हालांकि, एक अधिकारी ने बताया कि शुरुआती जांच में यह शक जताया गया है कि आग किसी इलेक्ट्रिकल शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी हो सकती है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय जांच के बाद लिया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों की आवश्यकता को उजागर किया है, खासकर उन फैक्ट्रियों में जो खतरनाक सामग्री का उत्पादन करती हैं।

गुजरात सरकार ने इस घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं और संबंधित अधिकारियों को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय प्रशासन ने फैक्ट्री के मालिकों और अधिकारियों से सवाल किए हैं कि क्या सभी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था, और क्या आग के दौरान कर्मचारी सुरक्षित थे। इसके साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हों और सुरक्षा मानकों को कड़ा किया जाए।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और मुआवजा

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल और राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने इस हादसे पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है और मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी सहानुभूति प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की है कि राज्य सरकार मृतकों के परिवारों को उचित मुआवजा प्रदान करेगी और घायल लोगों के इलाज के लिए सभी प्रकार की मदद की जाएगी। मुआवजे के रूप में प्रत्येक मृतक के परिवार को एक निश्चित राशि देने की घोषणा की गई है, और गंभीर रूप से घायल श्रमिकों को चिकित्सा सहायता देने के लिए राज्य सरकार ने सभी अस्पतालों को निर्देशित किया है।

कटक में शॉपिंग मॉल में आग

वहीं, दूसरी ओर, मंगलवार को ओडिशा के कटक में भी एक शॉपिंग मॉल में आग लग गई। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन आग में लाखों रुपये के सामान का नुकसान हुआ है। दमकल विभाग ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया, और इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। आग लगने का सही कारण अभी स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन संदेह जताया जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट की वजह से यह आग लगी हो, विशेष रूप से एयर कंडीशनर के कारण।

यह घटना भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करती है, खासकर ऐसे व्यावसायिक स्थानों पर जहां बड़े पैमाने पर सामग्रियों का भंडारण और व्यापार होता है। कटक की इस घटना ने यह दर्शाया कि कितना महत्वपूर्ण है कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में आग सुरक्षा प्रणालियाँ और मानक सख्ती से लागू किए जाएं।

सुरक्षा मानकों के पालन की जरूरत

गुजरात के बनासकांठा और ओडिशा के कटक की घटनाओं ने यह फिर से साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों का पालन बेहद आवश्यक है। विशेष रूप से ऐसे कारखानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में जहां खतरनाक सामग्री का उत्पादन या भंडारण किया जाता है, वहां सुरक्षा प्रोटोकॉल को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए। यदि सुरक्षा उपायों को सही ढंग से लागू किया जाए तो इस तरह की दुर्घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। इसके अलावा, यह भी जरूरी है कि ऐसी घटनाओं के बाद तत्काल राहत और बचाव कार्य को तेज किया जाए ताकि जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके।

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