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PM Modi: भारत और जर्मनी के बीच संबंधों में तेजी से सुधार हो रहा है, जो सहयोग, व्यापार, और सामरिक साझेदारी पर केंद्रित है। हाल ही में, जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज का भारत दौरा इस संबंध को और मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था। इस लेख में हम चर्चा करेंगे चांसलर स्कोल्ज की यात्रा के दौरान हुए प्रमुख विचार-विमर्श, उनके महत्व और भविष्य में इन संबंधों के प्रभाव पर।

बैठक का अवलोकन

चांसलर ओलाफ स्कोल्ज की भारत यात्रा सातवें अंतर-सरकारी परामर्श (IGC) का हिस्सा थी, जो नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में आयोजित की गई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई, जो दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकती हैं।

पीएम मोदी के उद्घाटन भाषण

पीएम मोदी ने चांसलर स्कोल्ज के चौथे भारत दौरे का स्वागत करते हुए कहा, “आज का दिन विशेष है। चांसलर स्कोल्ज का बार-बार आना भारत-जर्मनी संबंधों पर उनके ध्यान को दर्शाता है।” उन्होंने इस अवसर पर एशिया-पैसिफिक कॉन्फ्रेंस ऑफ जर्मन बिजनेस 2024 का उद्घाटन किया।PM Modi

मुख्य चर्चा बिंदु

1. आर्थिक सहयोग को बढ़ावा

बैठक के दौरान, दोनों नेताओं ने आर्थिक सहयोग को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। पीएम मोदी ने बताया कि 12 वर्षों के बाद भारत में एशिया-पैसिफिक कॉन्फ्रेंस का आयोजन हो रहा है, जिससे व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी।PM Modi

2. कुशल श्रमिकों की वीजा संख्या में वृद्धि

एक महत्वपूर्ण निर्णय के तहत, जर्मनी ने भारत के कुशल श्रमिकों के लिए वीजा की संख्या को 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने का ऐलान किया। पीएम मोदी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे जर्मनी के विकास को नई गति मिलेगी।

3. डिजिटलाइजेशन की दिशा में कदम

चांसलर स्कोल्ज ने यह भी बताया कि जर्मनी अपनी वीजा प्रक्रियाओं को डिजिटलीकरण कर रहा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा। यह पहल भारत के कुशल युवाओं को आकर्षित करने में सहायक होगी।

सामरिक सहयोग

बैठक में सामरिक सहयोग पर भी चर्चा की गई। पीएम मोदी ने भारत के मजबूत लोकतंत्र, जनसांख्यिकी, और मांग का उल्लेख किया और कहा कि ये सभी भारत के विकास के स्तंभ हैं। जर्मनी ने भी इस दिशा में सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।PM Modi

वैश्विक सुरक्षा चिंताएँ

चांसलर स्कोल्ज ने वैश्विक सुरक्षा चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 21वीं सदी में कोई वैश्विक पुलिसकर्मी नहीं है। उन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि यदि रूस सफल होता है, तो यह यूरोपीय सीमाओं से परे प्रभाव डालेगा। मध्य-पूर्व में तनाव और कोरियाई प्रायद्वीप में स्थिति को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

भारत-जर्मनी संबंधों के प्रभाव

आर्थिक विकास और नवाचार

भारत और जर्मनी के बीच बढ़ता आर्थिक सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित होगा। कुशल श्रमिकों की बढ़ती संख्या और व्यापारिक सहयोग से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।PM Modi

शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान

भारत में जर्मनी की शैक्षिक प्रणाली की सफलता और जर्मन विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंधों में सुधार हो रहा है। इससे आपसी समझ और सहयोग में वृद्धि होगी।PM Modi

सामरिक साझेदारी

भारत और जर्मनी के बीच सामरिक साझेदारी के बढ़ने से दोनों देशों को क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी। यह सहयोग न केवल आर्थिक बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण होगा।PM Modi

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