महाराष्ट्र के नागपुर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद राज्य में राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री और बीजेपी नेताओं ने हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है। इस हिंसा के बाद उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय को विश्वास दिलाते हुए कहा कि अगर किसी ने मुस्लिम भाइयों को आंख दिखाने की कोशिश की, तो उसे किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कोई भी हो।
यह बयान अजित पवार ने अपनी पार्टी एनसीपी की तरफ से आयोजित रोजा इफ्तार के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय के लोगों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें किसी भी प्रकार की हिंसा का शिकार न होना पड़े। पवार ने इस दौरान यह भी कहा कि जिन लोगों ने दो समुदायों के बीच संघर्ष भड़काने की कोशिश की और कानून अपने हाथ में लिया, उन्हें सख्त सजा दी जाएगी। उनका यह बयान उस समय आया है जब राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है।
अजित पवार ने रमजान के अवसर पर यह भी बताया कि यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह हमें एकता और भाईचारे का संदेश देता है। उनका मानना है कि रमजान से हमें जरूरतमंदों की पीड़ा को समझने की प्रेरणा मिलती है और यह भारतीय समाज की विविधता में एकता का प्रतीक है। उन्होंने इस मौके पर कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता में है और हमें इसे सहेज कर रखना चाहिए।
इस इफ्तारी कार्यक्रम में अजित पवार के साथ एनसीपी के अन्य वरिष्ठ नेता जैसे प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, सना मलिक और नवाब मलिक भी मौजूद थे। इस इफ्तार आयोजन में भारी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग शामिल हुए थे। अजित पवार का यह बयान उस समय आया है जब नागपुर में हुई हिंसा के बाद पुलिस ने 105 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 10 किशोर भी शामिल हैं। अब तक इस मामले में 3 नई एफआईआर भी दर्ज की गई हैं और पुलिस जांच में जुटी हुई है।
नागपुर हिंसा और इसके बाद की राजनीतिक बयानबाजी ने राज्य में तनाव का माहौल बना दिया है। मुख्यमंत्री और बीजेपी नेताओं ने हिंसा में शामिल सभी दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं, अजित पवार का यह बयान शांति और एकता की ओर कदम बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच विश्वास और भाईचारे को बढ़ावा मिले।