हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ‘विजय संकल्प यात्रा’ की शुरुआत अंबाला से की है, जिसका उद्देश्य न केवल पार्टी को सशक्त करना है, बल्कि बीजेपी के जाट बनाम नॉन-जाट के नैरेटिव को तोड़ना भी है।

बीजेपी का जाट बनाम नॉन-जाट नैरेटिव

बीजेपी चुनावी रणनीति के तहत जाट बनाम नॉन-जाट के मुद्दे को उठाकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश कर रही है। पार्टी यह संदेश देने में जुटी है कि वोट कांग्रेस को नहीं, बल्कि हुड्डा (जाट नेता) को जाएगा। इससे कांग्रेस की चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

कांग्रेस की रणनीति

कांग्रेस ने अपनी रणनीति को बदलते हुए दलित वोट बैंक को सुरक्षित रखने की कोशिश की है। पार्टी के रणनीतिकार सुनील कानूगोलू की टीम ने राहुल गांधी को यह रिपोर्ट दी थी कि बीजेपी सैलजा और हुड्डा के बीच की अंतर्कलह का फायदा उठाकर दलितों के बीच जाट समर्थक की छवि स्थापित कर रही है।

राहुल गांधी की यात्रा का उद्देश्य

राहुल गांधी की यात्रा का मुख्य उद्देश्य जाट बनाम नॉन-जाट की राजनीति को खत्म करना और दलितों के बीच एकजुटता का संदेश देना है।

  1. एकजुटता का संदेश: यात्रा के दौरान राहुल ने कुमारी सैलजा और भूपेंद्र सिंह हुड्डा के साथ मंच साझा कर एकजुटता का संदेश दिया।
  2. जनता की समस्याएं: उन्होंने किसान, पहलवान और जवान के मुद्दों को उठाया, जिससे स्थानीय जनता की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया जा सके।
  3. जातिगत जनगणना: राहुल ने जातिगत जनगणना के मुद्दे को उठाकर दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।

यात्रा का रूट मैप

राहुल गांधी की यात्रा का प्रारंभ अंबाला से हुआ, और इसका रुख कुरुक्षेत्र की ओर है।

  • पहला दिन: अंबाला से कुरुक्षेत्र
  • दूसरा दिन: बहादुरगढ़ से गोहाना तक
  • विश्राम: 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन यात्रा में ब्रेक रहेगा
  • अंतिम प्रचार: 3 अक्टूबर को दक्षिण हरियाणा से आखिरी प्रचार के लिए यात्रा निकलेगी

इस यात्रा के दौरान 14 विधानसभा क्षेत्रों को कवर किया जाएगा, जिससे कांग्रेस को जमीनी स्तर पर अपने समर्थकों को mobilize करने में मदद मिलेगी।

राहुल गांधी का प्रभाव

राहुल गांधी की उपस्थिति ने कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरी है। उन्होंने जनता से वादा किया है कि कांग्रेस हरियाणा की जनता के साथ अन्याय नहीं होने देगी।

राहुल ने अंबाला में कहा, “बीजेपी ने हरियाणा को धोखा दिया है। अब हरियाणा इस अन्याय का हिसाब करेगा।”

इस प्रकार, उनकी यात्रा न केवल चुनावी मैदान में कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने की कोशिश है, बल्कि यह एक सशक्त राजनीतिक संदेश भी है जो बीजेपी के नैरेटिव को चुनौती देता है।

By admin

2 thoughts on “हरियाणा विधानसभा चुनाव: राहुल गांधी की ‘विजय संकल्प यात्रा’ का महत्व”
  1. This article got me thinking about comparable
    scenarios in other regions. It would be enlightening to see
    a cross-cultural examination of how different regions
    are tackling this challenge.

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