कांग्रेस और उद्धव सेना में मतभेद!कांग्रेस और उद्धव सेना में मतभेद!

महाराष्ट्र की राजनीति में हाल के घटनाक्रमों ने चर्चा का नया विषय पैदा कर दिया है। कांग्रेस और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के बीच खटपट की अटकलें लगाई जा रही हैं, जबकि बीजेपी के वरिष्ठ नेता अमित शाह और संजय राउत के बीच बातचीत की भी बातें हो रही हैं। यह दिलचस्प है कि ऐसे समय में जब स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब चर्चाएं तेज हो जाती हैं। विधानसभा चुनाव 20 नवंबर को एक चरण में होगा और नतीजे 23 नवंबर को आएंगे।

शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत का दावा है कि महा विकास आघाडी (MVA) ने 288 विधानसभा सीटों में से 210 पर आम सहमति बना ली है। वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि उनकी पार्टी 96 सीटों पर चर्चा पूरी कर चुकी है। दोनों नेताओं का कहना है कि बीजेपी चुनाव से पहले गलत सूचनाएं फैला रही है।

हालांकि, हाल के दिनों में कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं के बीच बयानबाजी ने संदेह उत्पन्न किया है। सोमवार को पटोले ने कहा कि एमवीए में कोई मतभेद नहीं है और सीट बंटवारे पर चर्चा जारी है। इस बीच, प्रियंका चतुर्वेदी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें वह प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करती दिख रही हैं, जिससे स्थिति और भी जटिल हो गई है।कुछ समाचार चैनलों पर ऐसी खबरें आई हैं कि उद्धव ठाकरे की पार्टी एमवीए से अलग होकर सभी 288 सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ सकती है। इस बात की चर्चा भी है कि बीजेपी और शिवसेना के बीच फिर से संबंधों को सुधारने की कोशिश की जा रही है। संजय राउत ने अमित शाह के साथ फोन पर हुई बातचीत को लेकर कहा कि बीजेपी गलत सूचनाएं फैला रही है। उनका कहना है कि भाजपा ने 2022 में शिवसेना में विभाजन कराया और ठाकरे की एमवीए सरकार को गिरा दिया।राउत ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने “गद्दारों” को सत्ता में बैठाया, जो राज्य के विकास के लिए हानिकारक हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शिवसेना (यूबीटी) और बीजेपी के बीच पुनः गठबंधन की संभावना न के बराबर है।

कांग्रेस के नाना पटोले ने भी ऐसी खबरों का खंडन किया है कि शिवसेना (यूबीटी) गठबंधन छोड़ने की योजना बना रही है। पटोले ने कहा, “भाजपा विपक्षी दलों के बारे में भ्रम फैला रही है। हम महाराष्ट्र में एमवीए को सत्ता में लाने के लिए एकजुट हैं।”शरद पवार और उद्धव ठाकरे के बीच आगे की बातचीत आज होगी। जिसके बाद उम्मीदवारों की सूची भी जारी की जा सकती है। यह चर्चा इस बात को और महत्वपूर्ण बनाती है कि क्या एमवीए में किसी प्रकार का असंतोष या मतभेद है। इन सभी घटनाक्रमों से स्पष्ट है कि महाराष्ट्र में चुनावी माहौल गर्म हो चुका है।

वहीं, सभी दल अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन बीजेपी के खिलाफ एकजुट होकर एमवीए को कैसे आगे बढ़ाया जाएगा, यह देखने वाली बात होगी। इन अटकलों के बीच, आने वाले दिनों में राजनीतिक स्थिति और भी दिलचस्प मोड़ ले सकती है।

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