हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, हरियाणा में वायु प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। ग्रैप-1 (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के नियमों के लागू होने के बावजूद, बहादुरगढ़ देश के दूसरे सबसे प्रदूषित शहर के रूप में उभरा है, जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 335 तक पहुंच गया है। वहीं, सोनीपत चौथे स्थान पर है, जिसका AQI 321 है। दिल्ली, जो देश की राजधानी है, का AQI 382 दर्ज किया गया है, जिससे यह सबसे प्रदूषित शहर बना हुआ है।

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन पी राघवेंद्र राव ने सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए सख्त कार्रवाई करें। उन्होंने कहा कि नगर निगम, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के स्थानीय अधिकारियों की जिम्मेदारियां स्पष्ट की गई हैं, और किसी भी लापरवाही पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।

पराली जलाने की घटनाएं

रविवार को पराली जलाने के 19 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे कुल मामलों की संख्या 857 तक पहुंच गई है। इसके साथ ही, राज्य सरकार को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इन घटनाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है, जिसमें पराली जलाने को रोकने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख होगा। कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल, अंबाला और जींद जैसे जिलों में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएं हुई हैं।

हवा की गुणवत्ता में सुधार

दो नवंबर को देश के 70 शहरों में हवा की गुणवत्ता खराब थी, जिनमें हरियाणा के 11 शहर भी शामिल थे। हालांकि, तीन नवंबर को 23 शहरों में हवा की गुणवत्ता में सुधार देखा गया। फिर भी हरियाणा के 11 शहरों में प्रदूषण की स्थिति बनी रही, जैसे कि भिवानी (AQI 300), चरखी दादरी (AQI 280), और गुरुग्राम (AQI 281)।

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