छात्र से सीधा बना मजदूर घर से भागा कर पहुंचा बेंगलुरु

दिल्ली के रोहिणी में रहने वाला 17 साल का एक छात्र परीक्षा से बचने के लिए घर से भाग गया और लगभग 2,000 किलोमीटर दूर बेंगलुरु चला गया। यह छात्र, जो एक प्रतिष्ठित स्कूल के 11वीं कक्षा का छात्र था, पढ़ाई में बिल्कुल भी रुचि नहीं रखता था और वार्षिक परीक्षा भी नहीं देना चाहता था। 21 फरवरी 2025 को घर से निकलते वक्त उसने अपने पिता को एक संदेश भेजा, जिसमें उसने बताया कि वह घर से जा रहा है और कोई उसकी तलाश न करे। इसके बाद, वह बेंगलुरु में एक निर्माण स्थल पर मजदूर के रूप में काम करने लगा और झुग्गी में रहने लगा।

इस घटना के बाद लड़के के परिवार ने बुद्ध विहार थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह के अनुसार, लड़के ने घर छोड़ते समय किसी से नहीं कहा कि वह कहाँ जा रहा था, लेकिन बाद में यह जानकारी मिली कि वह बेंगलुरु पहुंचा था। पुलिस ने उसकी तलाश के लिए कई टीमों का गठन किया और उसे तमिलनाडु के कृष्णागिरी क्षेत्र से पकड़ा।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि लड़का आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के तहत स्कूल में दाखिला लिया था और उसके पिता एक चालक के तौर पर काम करते हैं। लेकिन छात्र को स्कूल का माहौल कभी अच्छा नहीं लगा और उसे लगता था कि वह इसे अपनाने में असमर्थ है। इसके कारण, उसने अपनी पढ़ाई छोड़कर पैसा कमाने और स्वतंत्र रहने की इच्छा जताई। उसने अपने सहपाठियों से बिटकॉइन के बारे में सुना था और जल्दी पैसे कमाने के लिए बिटकॉइन में निवेश करने की कोशिश भी की थी। इस कारण उसने पहले ट्रेन पकड़ी और बेंगलुरु पहुंचकर कृष्णागिरी में एक निर्माण स्थल पर काम की तलाश शुरू कर दी।

मामले की जांच से यह भी पता चला कि लड़का निर्माण स्थल पर काम करने के बाद एक झुग्गी में रहने लगा। पुलिस ने उसे कृष्णागिरी में काम करते हुए ढूंढा और उसे अपने घर वापस लाया। इस घटना ने यह सवाल उठाया कि बच्चों में बढ़ती हुई आर्थिक स्वतंत्रता की चाहत और दबाव के कारण शिक्षा प्रणाली के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को किस प्रकार समझा और सुधारा जा सकता है।

छात्र से सीधा बना मजदूर घर से भागा कर पहुंचा बेंगलुरु

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