पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने भी एक्स पर एक वीडियो डालकर कहा, ‘भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती, लेकिन पीसीबी का कोई प्रतिनिधि फाइनल के बाद नहीं था। चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के समापन समारोह में दुबई में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों को मंच पर आईसीसी द्वारा नहीं बुलाए जाने से रविवार को विवाद पैदा हो गया। एक सूत्र ने कहा कि पीसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमैर अहमद मैदान में मौजूद थे, लेकिन उन्हें समारोह में नहीं बुलाया गया। वह टूर्नामेंट के निदेशक भी हैं।
1. समारोह में पाकिस्तान के अधिकारियों का गायब होना:
चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का फाइनल मैच भारत और एक अन्य देश के बीच हुआ था, जिसमें भारत ने जीत हासिल की। फाइनल के समापन समारोह के दौरान, जब पुरस्कार वितरण का समय आया, तो आईसीसी (अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद) ने मंच पर भारत और अन्य देश के खिलाड़ियों को पुरस्कार दिए। इस समारोह में आईसीसी के अध्यक्ष जय शाह, बीसीसीआई (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के अध्यक्ष रोजर बिन्नी और सचिव देवजीत सैकिया भी मंच पर मौजूद थे। लेकिन पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का कोई प्रतिनिधि मंच पर नहीं था, जो अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।
चर्चा के अनुसार, पीसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुमैर अहमद समारोह के दौरान दुबई में मौजूद थे, लेकिन उन्हें मंच पर बुलाया नहीं गया। सूत्रों के मुताबिक, पीसीबी के सीईओ ने समारोह के आयोजकों से संपर्क किया था, लेकिन किसी न किसी कारणवश या गलतफहमी के कारण उन्हें मंच पर नहीं बुलाया गया। यह स्थिति पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए शर्मिंदगी का कारण बन गई, क्योंकि इस स्थिति ने उनके प्रतिष्ठान को ठेस पहुंचाई थी।
2. पीसीबी अध्यक्ष का दुबई न पहुंच पाना:
सूत्रों के अनुसार, पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी दुबई नहीं जा सके थे क्योंकि उन्हें अपने गृहमंत्री के रूप में कुछ सरकारी कार्यों का पालन करना था। इसी कारण से उन्होंने समारोह में भाग लेने के लिए पीसीबी के सीईओ को भेजा था, ताकि पाकिस्तान की उपस्थिति और प्रतिष्ठान बनी रहे। लेकिन चूंकि सीईओ को मंच पर नहीं बुलाया गया, इसने एक बड़ी असहमति और विवाद को जन्म दिया।
यह स्थिति इसलिए भी खास है क्योंकि पाकिस्तान इस टूर्नामेंट का मेज़बान था। इसके अलावा, एक ऐसे खेल आयोजन के समापन समारोह में मेज़बान देश के अधिकारियों का गायब होना किसी भी क्रिकेट प्रेमी के लिए अजीब और निराशाजनक हो सकता है।
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3. शोएब अख्तर की नाराजगी:
पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर ने इस पूरे मामले पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने कहा, “भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी जीती, लेकिन पीसीबी का कोई प्रतिनिधि फाइनल के बाद नहीं था। पाकिस्तान मेज़बान था। मेरी यह समझ में नहीं आया कि पीसीबी से कोई वहां क्यों नहीं था। कोई ट्रॉफी देने क्यों नहीं आया, कोई रिप्रजेंट करने क्यों नहीं आया?”
शोएब अख्तर ने कहा कि यह स्थिति सच में उनके समझ से परे थी और उन्होंने इस पर गहरी निराशा जताई। वह यह सवाल उठा रहे थे कि जब पाकिस्तान मेज़बान देश था तो उसके अधिकारियों का मंच पर होना जरूरी था। उन्होंने यह भी कहा कि यह वर्ल्ड स्टेज था और पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व वहां जरूरी था, लेकिन दुर्भाग्यवश कोई भी वहां मौजूद नहीं था। अख्तर ने इसे एक गंभीर मसला बताया और कहा कि यह एक महत्वपूर्ण बात है जिस पर क्रिकेट बोर्ड को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
4. हाईब्रिड मॉडल और टूर्नामेंट का आयोजन:
यह विवाद इसलिए भी अहम है क्योंकि चैंपियंस ट्रॉफी 2025 का आयोजन एक हाईब्रिड मॉडल पर किया गया था। भारत ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान में अपने मैच खेलने से इनकार कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी से सहमति जताई कि भारतीय टीम अपने मैच दुबई में खेलेगी, ताकि टूर्नामेंट का आयोजन बिना किसी समस्या के हो सके।
यह हाईब्रिड मॉडल था, जो भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेटing संबंधों की स्थिति को समझते हुए तैयार किया गया था। पीसीबी की सहमति के बाद भारत ने टूर्नामेंट में भाग लिया और इसका आयोजन सफलतापूर्वक हुआ। हालांकि, पुरस्कार वितरण समारोह में पाकिस्तान के अधिकारी का अनुपस्थित रहना, इसके बाद से इस मुद्दे को और अधिक तूल दिया गया।
5. पीसीबी की प्रतिक्रिया और भविष्य में उठाए जाने वाले कदम:
पीसीबी इस मसले को आईसीसी के समक्ष उठा सकता है, और संभावना है कि वह इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगेगा। इससे यह सवाल उठता है कि क्या आयोजकों और आईसीसी से जुड़ी किसी प्रकार की गलतफहमी थी या फिर यह एक और बड़ा मामला था जो जानबूझकर हुआ। पीसीबी इस मुद्दे को लेकर किसी प्रकार की औपचारिक जांच की मांग कर सकता है।
हालांकि, यह भी संभव है कि यह एक छोटी सी गलती या संवादहीनता का परिणाम हो, लेकिन इसका असर पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमियों और पीसीबी की प्रतिष्ठा पर पड़ा है। यह घटना यह भी दिखाती है कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसे विवाद कभी भी हो सकते हैं और इसे सुलझाना महत्वपूर्ण है।