हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर से गर्मी बढ़ गई है। प्रदेश के कार्यवाहक मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष उदयभान पर एक विवादास्पद टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि यदि उदयभान मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताते हैं, तो उन्हें उसी दिन गाड़ी से उतार दिया जाएगा। यह बयान हरियाणा की राजनीतिक गर्मागर्मी को दर्शाता है, जहाँ भाजपा और कांग्रेस के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।

सैनी का यह बयान मंगलवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय मंगल-कमल में आयोजित ब्राह्मण संगठनों की बैठक के बाद आया। इस बैठक में भाजपा के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली और प्रदेश संगठन मंत्री फनींद्र नाथ शर्मा शामिल थे। नायब सैनी ने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को भी निशाने पर लिया और उन्हें दलित विरोधी करार दिया।

सैनी ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा झूठ और लूट के साथ राजनीति की है। उन्होंने कहा, “प्रदेश की जनता अब हुड्डा और कांग्रेस पर विश्वास नहीं कर रही है।” सैनी का कहना था कि भाजपा के पक्ष में माहौल बना हुआ है और ब्राह्मण समाज का आशीर्वाद उनके साथ है।

नायब सैनी ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल भ्रष्टाचार के मामलों में जेल गए थे और अब जमानत मिलने के बाद “डॉन की तरह” बाहर निकले हैं। उनका कहना था कि केजरीवाल को हरियाणा नहीं, बल्कि पंजाब जाना चाहिए, जहां उन्हें किसानों की फसल एमएसपी पर खरीद करवाने का काम करना चाहिए।

हरियाणा की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच की टकराव की पृष्ठभूमि में यह बयान महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों में, भाजपा ने राज्य में अपने आधार को मजबूत किया है, जबकि कांग्रेस को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सैनी का यह बयान कांग्रेस के भीतर के असंतोष को उजागर करता है, जहाँ नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा और गुटबाजी दिखाई देती है।

हरियाणा में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच यह बयान एक महत्वपूर्ण मोड़ ले सकता है। भाजपा ने अपने आधार को मजबूत करने के लिए विभिन्न जातियों के साथ संवाद स्थापित किया है, जिसमें ब्राह्मण समाज का सहयोग भी शामिल है। सैनी ने इस बैठक में ब्राह्मण समाज के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि उनकी पार्टी उनके साथ है और वे किसी भी प्रकार के सामाजिक विभाजन को बढ़ावा नहीं देंगे।

सैनी के इस बयान पर विभिन्न राजनीतिक विश्लेषक और विपक्षी दल के नेता प्रतिक्रिया देने लगे हैं। कांग्रेस के नेता इसे अपमानजनक करार दे रहे हैं और उनका कहना है कि भाजपा के नेताओं के पास किसी भी गंभीर मुद्दे पर चर्चा करने का समय नहीं है। वे केवल एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं, जिससे प्रदेश की जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से भटक जाता है।

हरियाणा में राजनीतिक असंतोष और सामाजिक विभाजन का एक बड़ा हिस्सा है। विशेषकर दलित समुदाय और ब्राह्मण समुदाय के बीच की रेखाएँ और भी गहरी होती जा रही हैं। सैनी का बयान इस सामाजिक विभाजन को और बढ़ावा देने वाला हो सकता है। इसके परिणामस्वरूप, राजनीतिक स्थिति और भी जटिल हो सकती है, जिससे चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

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