हरियाणा में बीजेपी और जेजेपी गठबंधन की सरकार के दौरान 1103 करोड़ 94 लाख रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है। इसका खुलासा CAG की रिपोर्ट में हुआ है। वित्तीय वर्ष 2021-22 की रिपोर्ट में बिक्री कर, राज्य उत्पाद शुल्क, स्टैंप शुल्क और पंजीकरण फीस में ये नुकसान हुआ है। 104 यूनिट के 2,552 मामलों की जांच में ये गड़बड़ी सामने आई है। 1077 मामलों में 643.07 करोड़ रुपये की कमियां खुद विभागों ने मानी हैं।
कैसे तैयार होती है CAG रिपोर्ट?
- CAG (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) सरकार और उसकी एजेंसियों के खातों का ऑडिट करता है
- सरकार की संपत्तियों और देनदारियों की निगरानी करता है
- सरकार के लाभ और हानि का ऑडिट करता है
- सरकार के वार्षिक वित्तीय विवरण तैयार करने में मदद करता है
- नेट इनकम और टैक्सेस ड्यूटी पर प्रमाण पत्र प्रदान करता है
- लोन, एडवांस और संदिग्ध खातों से जुड़े लेन-देन का ऑडिट करता है
- सरकार पब्लिक फाइनेंस से जुड़े मामलों में CAG से सलाह लेती है
CAG ने रिपोर्ट में कहा गया है कि, सरकार में राजस्व से जुड़े ऐसे कई फैसले लिए गए, जिससे सरकार को नुकसान उठाना पड़ा। इसमें कुछ चीजें टैक्स फ्री कर दी गईं। अवैध शराब की पेनल्टी नहीं वसूली गई। प्राइवेट फर्मों को रजिस्ट्री में 3 करोड़ की छूट दी गई। इसके अलावा गलत रेट से रजिस्ट्री करने की वजह से भी करोड़ों का नुकसान हुआ।
CAG ने हरियाणा सरकार की 7 गड़बड़ियों को पकड़ा
- टैक्स लगाने की जगह फ्री किया, 5 करोड़ का नुकसान
CAG की रिपोर्ट में सरकार के रेवेन्यू कलेक्शन पर सवाल उठाए गए हैं। CAG के मुताबिक, वित्त वर्ष के दौरान टैक्स निर्धारण संस्थाओं ने कुछ वस्तुओं पर टैक्स लगाने के बजाय उन्हें टैक्स फ्री कर दिया, जिससे राजस्व को करीबन 5 करोड़ का नुकसान हुआ। इसके अतिरिक्त सरकार को 4 करोड़ 77 लाख रुपए का ब्याज भी कम मिला।
- टैक्स निर्धारण भी गलत तरीके से किया गया
रिपोर्ट में टैक्स निर्धारण करने वाले जिम्मेदारों ने वित्तीय वर्ष के दौरान टैक्स निर्धारण भी गलत तरीके से किया। इस दौरान जहां 36 करोड़ 61 लाख का टैक्स निर्धारण होना चाहिए था, वहां टैक्स प्राधिकरणों ने करीब 28 करोड़ निर्धारित किया। इससे सरकार को करीबन एक करोड़ कम टैक्स मिला। उत्पाद शुल्क कलेक्शन पर भी CAG ने सवाल उठाए।
- रजिस्ट्री-एक्साइज से पेनल्टी-ब्याज वसूला नहीं गया
CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा गया है कि, अवैध शराब के लिए अपराधियों से पेनल्टी वसूलने, लाइसेंस फीस और ब्याज वसूलने में पहल नहीं की गई। इसके चलते सरकारी राजस्व को साढ़े 7 करोड़ का नुकसान हुआ। जमीन की खरीद-फरोख्त में स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अनियमितताओं के कारण सरकार को 26 करोड़ रुपये कम राजस्व मिला।
- प्राइवेट फर्मों को गलत तरीके से 3 करोड़ की छूट दी गई
रजिस्ट्री अथॉरिटी ने मार्केट कमेटी गुरुग्राम, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण और उत्तर हरियाणा बिजली प्रसारण निगम लिमिटेड को सरकारी संस्था मानते हुए स्टैंप ड्यूटी में 3.11 करोड़ रुपये की गलत तरीके से छूट दी।
CAG रिपोर्ट में ये भी खुलासे
- रिपोर्ट में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे
- स्टैंप और रजिस्ट्रेशन फीस की कम वसूली की गई
- ब्लड रिलेशन के अलावा अन्य व्यक्तियों को स्टैंप फीस में छूट दी
- 1000 वर्ग गज प्लॉटों की कृषि भूमि दिखाकर रजिस्ट्री हुई
इन विभागों के मंत्री थे दुष्यंत चौटाला
- राजस्व और आपदा प्रबंधन
- उद्योग और वाणिज्य
- खाद्य नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले
- उत्पाद शुल्क और कराधान
- लोक निर्माण, नागरिक उड्डयन
- पुनर्वास, श्रम एवं रोजगार, चकबंदी
कई नगर पालिकाओं की सीमा के अंदर आने वाले 1 हजार वर्ग गज से कम के प्लॉटों की 14 बिक्री मामलों में आवासीय भूमि के बजाय कृषि भूमि की दरों से स्टैंप फीस ली गई। इससे राजस्व को 57 लाख स्टाफ ड्यूटी का नुकसान हुआ।
- व्यवसायिक प्लॉटों के बदले किसानों को स्टैंप ड्यूटी से छूट दी
50 मामलों में किसानों को स्टैंप ड्यूटी में छूट की अनुमति दी गई। जबकि वे मुआवजे या फिर व्यवसायिक प्लॉट खरीदे गए थे। ये प्लॉट हरियाणा सरकार के नवंबर 2010 में जारी आदेश के अनुसार नहीं थे। इससे राजस्व को एक करोड़ 61 लाख रुपए के कम शुल्क और पंजीकरण फीस का नुकसान हुआ।
- कलेक्टर रेट के बजाय जमाबंदी रेट पर रजिस्ट्री, 150 करोड़ का नुकसान
कई जगहों पर ऐसे मामले भी सामने आए, जहां रजिस्ट्रेशन अधिकारियों ने कृषि भूमि के लिए निर्धारित सामान्य दरों पर प्राइम खसरा भूमिका गलत निर्धारण किया। इससे प्रदेश को 64 लाख प्राप्त ड्यूटी का नुकसान हुआ। 142 कृषि जमीन के रजिस्ट्रेशन मामलों में अधिकारियों ने उसे जमीन के कलेक्टर रेट के बजाय जमाबंदी रेट पर पंजीकरण कर दिया। इससे सरकार को करीबन 150 करोड़ रुपए के स्टैंप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस का नुकसान हुआ।
- ज्यादा ग्रेच्युटी, दोहरी पेंशन निकासी भी हुई
CAG के महालेखाकार ने ये भी कहा है कि, सरकार का लेनदेन के नियमों पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं रहा। इस वजह से निर्धारित सीमा से अधिक ग्रेच्युटी का भुगतान, दोहरी पेंशन निकासी और LTC की दोहरी निकासी के मामले भी सामने आए हैं।