महाराष्ट्र के नागपुर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के लिए रणनीतियों को निर्धारित करना और मतदान प्रतिशत में वृद्धि सुनिश्चित करना था। शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदान प्रतिशत में कम से कम 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए।

बैठक के दौरान, अमित शाह ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और संरक्षण से संबंधित ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह विधेयक जल्द ही संसद में पारित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकना और उनके प्रबंधन को बेहतर बनाना है। यह विधेयक धार्मिक और सांस्कृतिक स्थानों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अमित शाह ने कार्यकर्ताओं को सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन सहयोगियों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि विदर्भ क्षेत्र की 62 विधानसभा सीटों की महत्वपूर्ण भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पूर्व राज्यसभा सदस्य अनिल बोंडे ने कहा कि शाह ने स्पष्ट दिशा देते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को जीत का रास्ता दिखाया, जो विदर्भ क्षेत्र से होकर गुजरता है।

महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों में से 62 विदर्भ क्षेत्र में हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद, अमित शाह ने कार्यकर्ताओं से अतिरिक्त प्रयास करने और मतदाताओं तक पहुंचने की सलाह दी। यह चुनाव BJP के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं, खासकर यह देखते हुए कि पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख मुद्दों को अपने पक्ष में किया है, जैसे कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करना और अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण।

शाह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया, जिसमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  • अनुच्छेद 370 का समाप्त होना: यह निर्णय जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करता है और उसे भारत के अन्य हिस्सों के साथ जोड़ता है।
  • अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण: यह भारतीय संस्कृति और धार्मिक भावनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भाजपा के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है।
  • तीन तलाक का रद्द होना: यह महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं को मतदाताओं के बीच पहुँचाना चाहिए और एक सकारात्मक संदेश देने की आवश्यकता है। उन्होंने सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए भी उत्साह दिखाने का आह्वान किया और कहा कि एकजुटता में शक्ति है।

शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी कार्यकर्ता को 2024 के विधानसभा चुनावों में टिकट नहीं मिलता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उनका राजनीतिक करियर समाप्त हो गया है। यह बयान कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण था, खासकर उन लोगों के लिए जो चुनावी राजनीति में सक्रिय रहते हैं।

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