हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर सुनवाई की मांग की है। इस मामले में कोर्ट ने गृह मंत्रालय से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या राहुल गांधी भारत के नागरिक हैं या नहीं। यह याचिका काफी समय से कोर्ट में लंबित है, और इससे पहले भी इस विषय पर सुनवाई हो चुकी है।

नागरिकता का विवाद

राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर उठे सवालों की शुरुआत तब हुई जब एक याचिकाकर्ता, विग्नेश शिशिर, ने 12 सितंबर को एक याचिका दायर की। याचिका में दावा किया गया है कि राहुल गांधी यूनाइटेड किंगडम (यूके) के नागरिक हैं। याचिकाकर्ता ने इस दावे के साथ सीबीआई जांच की मांग भी की है और यह कहा है कि राहुल गांधी की कथित ब्रिटिश नागरिकता के आधार पर उनकी भारतीय नागरिकता रद्द की जानी चाहिए।

कोर्ट की पूर्व की कार्रवाई

इससे पहले, जुलाई में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इसी तरह की एक याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता सिटीजनशिप एक्ट के तहत सक्षम प्राधिकारी के पास शिकायत कर सकता है। इस बार, हालांकि, हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने गृह मंत्रालय को जवाब देने के लिए कहा है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि राहुल गांधी की नागरिकता की स्थिति क्या है।

याचिका में क्या मांगा गया?

याचिका में यह भी मांग की गई है कि राहुल गांधी को तब तक संसद सदस्य के रूप में कार्य करने की अनुमति नहीं दी जाए जब तक गृह मंत्रालय उनकी विदेशी नागरिकता के मुद्दे पर निपटारा नहीं कर लेता। इसके साथ ही, याचिका में यह सवाल भी उठाया गया है कि राहुल गांधी किस कानूनी अधिकार के तहत लोकसभा सदस्य के रूप में काम कर रहे हैं।

अगली सुनवाई की तिथि

इस मामले में अगली सुनवाई 30 सितंबर को होनी है। कोर्ट की इस सुनवाई के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि राहुल गांधी की नागरिकता पर चल रही बहस का क्या नतीजा निकलेगा। अगर कोर्ट ने गृह मंत्रालय से स्पष्ट जानकारी मांगी, तो यह मामला और भी जटिल हो सकता है।

राजनीतिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य

राहुल गांधी की नागरिकता पर उठे सवाल केवल कानूनी पहलू नहीं हैं, बल्कि यह राजनीतिक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण हैं। इससे पहले, बीजेपी के कई नेताओं ने राहुल गांधी के खिलाफ इसी तरह के सवाल उठाए हैं। इन आरोपों का उद्देश्य कांग्रेस पार्टी की छवि को कमजोर करना और जनता के बीच भ्रम फैलाना हो सकता है।

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