देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग पर है. यह एक संवैधानिक संस्था है. ऐसे में इस संस्था को संविधान के तहत बड़ी ताकत दी गई है. कोई भी अधिकारी या नेता चुनाव आयोग के निर्देशों का उल्लंघन नहीं कर सकता है. ऐसे में चुनाव के दौरान मेडिकल लीव पर गए भारतीय पुलिस सेवा के वरिष्ठ अधिकारी आशीष कुमार सिंह को लेकर आयोग बेहद सख्त हो गया. आयोग के निर्देश पर सिंह की बृहस्पतिवार को यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), भुवनेश्वर में चिकित्सकीय जांच की गई.

निर्वाचन आयोग ने एम्स-भुवनेश्वर के निदेशक द्वारा गठित एक विशेष चिकित्सा बोर्ड द्वारा आईजी (मुख्यमंत्री सुरक्षा) सिंह की विस्तृत जांच का आदेश दिया था. आयोग ने एक आदेश में कहा था कि चार मई से चिकित्सा अवकाश पर चल रहे आशीष कुमार सिंह की चिकित्सा रिपोर्ट 31 मई तक आयोग के पास पहुंच जानी चाहिए.

सूत्रों ने बताया कि 2010 बैच के आईपीएस अधिकारी सुबह करीब 8.30 बजे एम्स-भुवनेश्वर पहुंचे और अपराह्न एक बजे वहां से चले गए. निर्वाचन आयोग ने राज्य में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मद्देनजर दो अप्रैल को सिंह को आईजी-सेंट्रल रेंज पुलिस के पद से हटा दिया था और उन्हें चुनाव संबंधी गतिविधियों में भाग लेने से परहेज करने का आदेश दिया था. इसके बाद ओडिशा सरकार ने उन्हें आईजी (मुख्यमंत्री सुरक्षा) नियुक्त किया था.

भारतीय जनता पार्टी की ओडिशा इकाई ने पांच अप्रैल को निर्वाचन आयोग में सिंह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि आईपीएस अधिकारी बीजू जनता दल के पक्ष में काम करना जारी रखे हुए हैं. ओडिशा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ हो रहे हैं.

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