मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल विवादों में घिरा रहा है और उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों खासकर हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ीं। इसके चलते भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में भी खटास आई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की शुक्रवार को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में मुलाकात हुई। शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी। दोनों नेता बिम्सटेक सम्मेलन से इतर मिले। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद रहे। दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट बातचीत हुई।
बांग्लादेश और भारत के रिश्तों का ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और बांग्लादेश के रिश्ते हमेशा से बहुत गहरे रहे हैं, विशेषकर 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत के समर्थन के कारण। हालांकि, समय-समय पर दोनों देशों के बीच कुछ तनाव पैदा हुआ है, खासकर सीमा विवाद, अवैध घुसपैठ, और अल्पसंख्यकों के अधिकारों को लेकर। बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और अत्याचार ने रिश्तों को और कठिन बना दिया है।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार के सत्ता से बाहर होने और मोहम्मद यूनुस द्वारा अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के बाद, दोनों देशों के रिश्तों में और खटास आ गई है। मोहम्मद यूनुस, जो बांग्लादेश के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और नोबेल पुरस्कार विजेता हैं, ने कई पहलें की हैं, जिनमें से कुछ विवादों में भी घिर चुकी हैं। यूनुस का कार्यकाल बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों के लिए आलोचना का शिकार रहा है, और इसके कारण भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में तनाव बढ़ा है।
प्रधानमंत्री मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात
बैंकॉक में हुई यह मुलाकात बांग्लादेश और भारत के बीच एक अहम राजनीतिक मोड़ का संकेत देती है। यह मुलाकात बिम्सटेक सम्मेलन से इतर थी, और इसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मौजूद थे। दोनों नेताओं के बीच लगभग 40 मिनट तक बातचीत हुई, जिसमें भारत-बांग्लादेश रिश्तों की वर्तमान स्थिति और भविष्य की दिशा पर चर्चा की गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुलाकात में जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जोर दिया, वे निम्नलिखित थे:
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लोकतांत्रिक और स्थिर बांग्लादेश का समर्थन: प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के प्रति भारत की लगातार समर्थन की बात की। भारत ने हमेशा बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान किया है और इस बार भी प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के प्रति भारत की सशक्त प्रतिबद्धता को दोहराया।
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द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की आवश्यकता: मोदी ने दोनों देशों के बीच सकारात्मक संबंधों को प्रोत्साहित करने के लिए बांग्लादेश के नेताओं से अपेक्षाएं जताईं। बांग्लादेश के विकास और समृद्धि के लिए भारत ने हमेशा बांग्लादेश की सहायता की है, और इस बार भी मोदी ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
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माहौल खराब करने वाली बयानबाजी से बचने की अपील: प्रधानमंत्री मोदी ने मोहम्मद यूनुस से कहा कि किसी भी प्रकार की बयानबाजी से बचा जाए जो माहौल को खराब कर सकती है। इस संदर्भ में यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पिछले कुछ समय में मोहम्मद यूनुस ने भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों पर विवादित बयान दिए थे, जो भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव का कारण बने थे। मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसे बयानों से दोनों देशों के बीच अनावश्यक खटास उत्पन्न होती है।
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सीमा सुरक्षा पर चर्चा: मोदी ने बांग्लादेश से भारत की सीमा पर अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया। सीमा सुरक्षा, दोनों देशों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है, और प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर सहयोग की आवश्यकता को रेखांकित किया।
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अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर चिंता: प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जताई। उन्होंने यह महसूस किया कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं, के खिलाफ अत्याचारों में वृद्धि हो रही है, और यह भारत-बांग्लादेश रिश्तों में और तनाव पैदा कर सकता है।
मोहम्मद यूनुस का विवादास्पद कार्यकाल
मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में विवादों में घिरा रहा है। एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में, उन्होंने गरीबों को वित्तीय सहायता देने के लिए “ग्रामीण बैंक” की स्थापना की, जिसके लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिला। हालांकि, उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचारों की घटनाएं बढ़ीं, और हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया।
बांग्लादेश में धार्मिक असहमति और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार: बांग्लादेश में हिंदू समुदाय और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को हिंसा का सामना करना पड़ा है। पिछले कुछ वर्षों में मंदिरों पर हमले, धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी हैं। मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में इन घटनाओं को नजरअंदाज किया गया या फिर इनका विरोध नहीं किया गया, जिससे भारत-बांग्लादेश रिश्तों में खटास आई है।
बांग्लादेश के बारे में भारत का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश को एक महत्वपूर्ण साझीदार के रूप में देखा है, जो भारतीय उपमहाद्वीप में एक प्रमुख शक्ति है। भारत ने हमेशा बांग्लादेश के लोकतांत्रिक रास्ते पर चलने का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही उसने यह भी स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, खासकर हिंदुओं की सुरक्षा, अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यदि बांग्लादेश में धार्मिक हिंसा और अल्पसंख्यकों के अधिकारों का उल्लंघन जारी रहता है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव दोनों देशों के रिश्तों पर पड़ेगा।
चीन और बांग्लादेश के रिश्तों का असर
हाल ही में, मोहम्मद यूनुस ने चीन के दौरे के दौरान भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों के बारे में एक विवादास्पद बयान दिया था। इस बयान के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में और तल्खी आई है। इस प्रकार के बयानों ने क्षेत्रीय राजनीति में और भी जटिलता पैदा की है। भारत ने बांग्लादेश से इस तरह के बयान न देने की अपेक्षाएं जताई हैं, क्योंकि यह दोनों देशों के रिश्तों को और बिगाड़ सकता है।