गिरिराज सिंह

लोकसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद कल्याण बनर्जी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। इस दौरान कल्याण बनर्जी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत पश्चिम बंगाल को मिलने वाले फंड्स पर सवाल उठाया और केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के प्रति अपनी टिप्पणी में उन्हें सवालों के घेरे में लिया, जिसके कारण सदन में हंगामा मच गया। इस बीच लोकसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा और सदस्यों से शांति बनाए रखने की अपील करनी पड़ी।

मनरेगा फंड का मुद्दा

कल्याण बनर्जी ने अपने सवाल में यह मुद्दा उठाया कि कैसे केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में मनरेगा के तहत मिलने वाली धनराशि को रोके हुए है। उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि मनरेगा योजना में 25 लाख फर्जी मामले सामने आए हैं। अगर फर्जी मामले पाए गए हैं, तो सरकार को इनकी जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि 25 लाख फर्जी मामलों के कारण पूरे राज्य के 10 करोड़ लोगों को उनकी मेहनत की कमाई से वंचित कर दिया जाए? यह अनुचित है। अगर फर्जी मामले हैं, तो अपराधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन आप पूरे राज्य के लोगों को सजा नहीं दे सकते।”

बनर्जी ने केंद्र सरकार से अपील की कि वह अपने फंड वितरण की नीति को लेकर पारदर्शिता अपनाए और सभी राज्यों को उनका अधिकार प्राप्त होने तक फंड्स जारी किए जाएं। उनका कहना था कि सरकार की इस नीति से राज्य सरकारें और स्थानीय स्तर पर कार्य कर रहे लोग सीधे प्रभावित हो रहे हैं।

गिरिराज सिंह पर टिप्पणी

इसके बाद कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने कहा, “आप एक केंद्रीय मंत्री हैं, लेकिन आपका व्यवहार इस प्रकार का है… आपको मंत्री किसने बनाया? क्या यह सही है कि मंत्री रहते हुए आप इस तरह से व्यवहार करते हैं?” यह टिप्पणी गिरिराज सिंह की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए की गई, जो तुरंत सत्ता पक्ष के नेताओं को गवारा नहीं आई।

बनर्जी की इस टिप्पणी पर सरकार की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया आई। केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बनर्जी की भाषा और उनके बर्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह संसद की गरिमा के खिलाफ है। मेघवाल ने कहा, “लोकसभा एक सम्मानित मंच है, जहां सभी सांसदों को एक दूसरे का सम्मान करना चाहिए। इस तरह की अपशब्दों से सदन की गरिमा को ठेस पहुंचती है।”

हंगामा और अध्यक्ष का हस्तक्षेप

बनर्जी और सत्ता पक्ष के बीच बढ़ते हंगामे को देखते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने दखल दिया। उन्होंने सदस्यों से अपील की कि वे आसन को संबोधित करें और एक-दूसरे पर व्यक्तिगत टिप्पणियां न करें। बिड़ला ने सभी सांसदों को चेतावनी दी कि यदि किसी सदस्य ने अपमानजनक टिप्पणी की तो इसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा, “सदस्यों को अपने शब्दों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए। अगर कोई सदस्य कुछ अनाधिकारिक टिप्पणी कर रहा है, तो उस पर प्रतिक्रिया न दें। हमें इस सदन की मर्यादा का ध्यान रखना होगा।”

लोकसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद माहौल शांत हुआ, लेकिन टीएमसी और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रहे। यह स्थिति तब आई जब सवाल-जवाब के दौरान गंभीर मुद्दों के बजाय व्यक्तिगत आक्षेप और आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।

केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार की ओर से जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि मनरेगा की योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा, “मनरेगा को लेकर जिन भी मामलों में फर्जीवाड़ा सामने आया है, सरकार उन मामलों की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि जो लोग सही तरीके से योजना का लाभ उठा रहे हैं, उन्हें कोई परेशानी न हो।”

सिंह ने कहा कि यह आरोप केवल पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि देशभर में मनरेगा योजना में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की घटनाएं सामने आई हैं, और सरकार उन्हें सुलझाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ मिलकर फंड की बेहतर वितरण प्रणाली सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है, ताकि योजना का लाभ सही तरीके से सभी तक पहुंचे।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्ष ने गिरिराज सिंह और केंद्र सरकार की नीतियों को निशाने पर लिया। टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के लाभार्थियों के साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं में धन के वितरण में पारदर्शिता की कमी के कारण गरीबों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। विपक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं में गलत आंकड़े पेश किए हैं, ताकि उनके कार्यों की विफलता को छिपाया जा सके।

मनरेगा योजना भारत सरकार की सबसे महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसे 2005 में लागू किया गया था। यह योजना ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन का एक अहम साधन है, जो गरीबों को न्यूनतम मजदूरी देने के अलावा ग्रामीण विकास कार्यों को भी बढ़ावा देती है। इस योजना के अंतर्गत, प्रत्येक परिवार को प्रति वर्ष 100 दिन काम करने का अधिकार होता है, और यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक साबित हुई है।

हालांकि, इस योजना की सफलता में भ्रष्टाचार और फर्जी मामलों का मुद्दा भी सामने आया है, जिसके कारण योजना के संचालन में कई बार व्यवधान आ चुका है। कई राज्य सरकारों ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार जानबूझकर उनके राज्य में मनरेगा के फंड्स को रोके रखती है, जिससे उन राज्यों में योजना का सही तरीके से संचालन नहीं हो पाता।

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