कांग्रेस नेता पवन खेड़ा

पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन भारतीय राजनीति और समाज के लिए एक गहरा धक्का था। उनका निधन 26 दिसंबर को हुआ था और इसके बाद से ही देश भर में शोक की लहर दौड़ गई थी। डॉ. सिंह ने अपनी लंबी और प्रभावशाली राजनीतिक यात्रा में भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया था। उनके योगदान को राजनीतिक दलों के सभी नेताओं ने सम्मानित किया। हालांकि, उनके निधन के बाद से सियासी हलकों में एक नया विवाद पैदा हो गया है, जो उनके अस्थि विसर्जन से जुड़ा हुआ है।

अस्थि विसर्जन पर विवाद की शुरुआत

डॉ. मनमोहन सिंह की अस्थियां उनके परिवार के सदस्यों द्वारा 28 दिसंबर को सिख रीति-रिवाजों के अनुसार यमुना नदी में विसर्जित की गईं। यह अवसर एक भावुक और निजी समय था, जो परिवार के लिए बहुत ही संवेदनशील था। इस दौरान गांधी परिवार का कोई सदस्य उपस्थित नहीं था, जो बाद में एक बड़ा विवाद बन गया।

इस अस्थि विसर्जन के समय गांधी परिवार का न आना भाजपा के नेताओं के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया। भाजपा ने इसे लेकर कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा। भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस या गांधी परिवार के किसी सदस्य ने डॉ. मनमोहन सिंह को सम्मान देने के लिए अस्थि विसर्जन के समय हिस्सा नहीं लिया। भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि यह अत्यंत दुखद था कि जब डॉ. सिंह की अस्थियां विसर्जित की जा रही थीं, तब कांग्रेस या गांधी परिवार का कोई सदस्य उपस्थित नहीं था। उनका कहना था कि कांग्रेस मीडिया में ध्यान आकर्षित करने के लिए मौजूद थी, लेकिन सम्मान देने की बात आई तो गांधी परिवार नदारद था।

कांग्रेस की सफाई

इस आरोप के बाद कांग्रेस ने सफाई दी कि परिवार की निजता का सम्मान करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. सिंह की अस्थियों को इकट्ठा करने और विसर्जित करने के लिए परिवार के साथ जाने का कोई प्रयास नहीं किया था। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि परिवार के कठिन समय में उन्हें कुछ निजता देना उचित था। पवन खेड़ा ने यह भी बताया कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने डॉ. सिंह के निधन के बाद उनके परिवार से मुलाकात की थी और इस मुलाकात में यह निर्णय लिया गया था कि अस्थि विसर्जन के समय परिवार को निजता दी जाए, ताकि यह एक निजी और भावनात्मक क्षण हो।

उन्होंने कहा, “हमने यह महसूस किया कि अंतिम संस्कार के समय परिवार को पूरी निजता नहीं मिल पाई थी और कुछ सदस्य चिता स्थल पर भी नहीं पहुंच पाए थे। इसलिए अस्थि विसर्जन के दौरान परिवार को यह निजता दी गई, ताकि वह शांति से यह कठिन समय बिता सकें।”

कांग्रेस ने यह भी कहा कि इस समय का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए था और इसे एक निजी पारिवारिक मामला माना जाना चाहिए था। कांग्रेस नेताओं ने यह स्पष्ट किया कि उनका मकसद किसी तरह का राजनीति नहीं था, बल्कि वे चाहते थे कि परिवार अपने प्रिय नेता के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन के समय शांति से इस दुखद घड़ी का सामना कर सके।

डॉ. मनमोहन सिंह का निधन

डॉ. मनमोहन सिंह का निधन 26 दिसंबर को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हुआ था। वह 92 वर्ष के थे और लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। उनका निधन भारतीय राजनीति में एक युग का अंत था। वह एक शांतिपूर्ण और शालीन व्यक्तित्व के मालिक थे, जिन्होंने भारतीय राजनीति में सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी नीतियों के कारण भारत को वैश्विक आर्थिक मंच पर मजबूती से खड़ा किया गया था।

मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भारत ने आर्थिक सुधारों की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। उनकी अध्यक्षता में भारतीय अर्थव्यवस्था ने एक नई दिशा पकड़ी, और उन्होंने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके कार्यकाल में भारतीय लोकतंत्र को एक नया दृष्टिकोण मिला था। उनके योगदान को भारतीय जनता हमेशा याद रखेगी।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा

भाजपा का आरोप और राजनीतिक बयानबाजी

भा.ज.पा. ने गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह मीडिया में प्रमुख भूमिका निभाने के लिए सक्रिय रहते हैं, लेकिन जब सम्मान देने की बात आई, तो गांधी परिवार वहां से गायब हो गया। भाजपा के कई नेताओं ने इसे कांग्रेस और गांधी परिवार की राजनीति से जोड़ते हुए कहा कि यह घिनौना और शर्मनाक था। भाजपा नेता अमित मालवीय ने ट्वीट करते हुए कहा, “यह देखकर बहुत दुख हुआ कि डॉ. मनमोहन सिंह जी की अस्थियां विसर्जित किए जाने के समय कांग्रेस या गांधी परिवार का एक भी सदस्य मौजूद नहीं था। मीडिया का ध्यान खींचने के लिए कांग्रेस मौजूद थी, लेकिन जब उन्हें सम्मान देने की बात आई तो वे नदारद हो गए। वाकई शर्मनाक है।”

भा.ज.पा. ने यह आरोप भी लगाया कि कांग्रेस अपने नेताओं को केवल मीडिया की चकाचौंध में रखना चाहती है और व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाती। भाजपा ने कहा कि गांधी परिवार ने इस अवसर पर अपनी जिम्मेदारी निभाने के बजाय इस घटना को नजरअंदाज किया।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया और परिवार का सम्मान

कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पार्टी का ध्यान हमेशा डॉ. मनमोहन सिंह की यादों और उनके योगदान को सम्मानित करने पर था। पार्टी ने यह भी कहा कि इस मौके पर परिवार की निजता का सम्मान करना और शांति से अंतिम संस्कार करना ज्यादा महत्वपूर्ण था। पवन खेड़ा ने कहा कि राजनीति करने के बजाय इस समय को सम्मान देने की जरूरत थी और यही वजह थी कि कांग्रेस ने अस्थि विसर्जन के समय गांधी परिवार को निजता देने का निर्णय लिया।

By Rahul Rawat

राहुल रावत उत्तराखंड के अलमोडा जिले के रानीखेत क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं. राहुल ने पत्रकारिता एवं जनसंचार में बैचलर किया है. राहुल 4 Iconic Media समूह से पहले एम.एच वन न्यूज, एसटीवी हरियाणा न्यूज, वी न्यूज डिजिटल चैनल, में भी काम कर चुके हैं. करीब 5 साल के इस सफर में दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब की राजनीति को करीब से देखा, समझने की कोशिश की जो अब भी जारी ही है.राहुल हरियाणा विधानसभा चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक कवर किया है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *